दोस्तो नमस्ते, एक बार फिर से आपका स्वागत है मेरे ब्लॉग में...
आज हम आपको बताएंगे! माता महलो वाली के बारे में....
जैसे की कहा जाता है की ऊपर वाले के रंग बड़े निराले होते हैं कुछ भी उसकी मर्जी के बिना नहीं होतातो ये बात है साल 1990 की जब माता रानी का इस कस्बे में आगमन हुआ...वास्तव में आज जिस स्थान पर ये मंदिर है वही पर साथ में ही एक प्राइमरी स्कूल है,और साथ में एक किला भी है ये किला रानी ज्वाला का था..जिनके नाम पर इस कस्बे (ज्वाली) का नाम रखा गया! उस स्कूल की एक वरिष्ठ शिक्षक को सपना आया की मेरे आगमन का समय आ गया है
सपनों में दिव्या शक्ति ने खुद बताया की वो को से कक्ष (स्थान) में मोजुद हैं..माता ने स्वप्न में उन शिक्षक को बताया कि की मैं मिट्टी के धेर में दबी हुई हूँ!मुझे बाहर निकालो..और स्थापना करो
उत्सकता वश वरिष्ठ शिक्षक ने अकेले किले
के अंदर जाने की हिम्मत दिखायी!और माता जी मूर्ति और उनके प्रतीक को बाहर ले कर आई!
माता की मूर्ति के बाहर आने के बाद स्थापना करना इतना आसान नहीं था! किले के वंशजो ने एकाएक किले पर और किले से मिली सारी ऐतिहासिक चीजो पर अधिकार बता दिया
काफ़ी समस्याओं के बाद मंदिर में माता जी की स्थापना हुई
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आशा है आने वाले समय में स्थिति सामान्य हो जाएगी और फिर से दुनिया खिलखायगी..इन शब्दों के साथ मैं अपनी पोस्ट समाप्त करूँगा आशा है आपको यह पसंद आएगी..जय माता दी
बहुत - बहुत धन्यवाद



