व्यापार वृद्धि के 6 सिद्ध उपाय !

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jankari 777 ब्लॉग में आपको रोचक जानकारी प्राप्त होगी, व्यक्तियों से संबंधित, स्थानों से संबंधित और भी काफ़ी कुछ, कृपया जुड़े रहे
लग्न कुंडली मे नवे भाव का स्वामी भाग्येश कहलाता है। भाग्येश के अनुकूल न होने के कारण जीवन में दुरूह परिस्थितियों से दो चार होना पडता है। अक्सर लोग कोई कार्य करते है, परंतु सफलता नहीं मिलती। हम कड़ी मेहनत करते हैं। परंतु परिणाम नुकसानदायक आता है। यह भाग्य की कमजोरी से होता है। भाग्य कमजोर होने पर सारे प्रयास विफल हो जाते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जन्म कुण्डली का नवम भाव भाग्य का होता है। यह स्थान यदि दूषित हो तो जातक भाग्यहीन होता है। नवम स्थान पर यदि चंद्र हो या उसकी दृष्टि हो तो भाग्य प्रबल होता है। वहीं राहु, मंगल, शनि यदि शत्रु राशि युक्त या नीच के हो तो जातक भाग्यहीनता से परेशान हो जाता है। उसको जरा जरा से काम में अड़चने आती हैं। सूर्य, शुक्र, बुध भाग्य स्थान पर सौभाग्यवती नारी दिलाते हैं। जो व्यक्ति के भाग्य को चमोत्कर्ष कर देती है। भाग्य स्थान पर गुरु मान सम्मान वैभव दिलाता है। वह व्यक्ति शुरू से ही अपने भाग्य के दम पर पूरे घर को तार देता है। केतु भाग्य स्थान पर सामान्य फल देने वाला होता है।
यदि बुध भाग्येश होकर अच्छा फल देने में असमर्थ हो तो निम्न उपाय करने चाहिए।
1. तांबे का कड़ा हाथ में धारण करें।
2. गणेश जी की उपासना करें।
3. गाय को हरा चारा खिलाएं।
यदि शुक्र भाग्येश होकर फलदायक न हो तो निम्न उपाय करने चाहिए।
1. स्फटिक की माला से क्क शुं शुक्राय नमः की एक माला का जप करें।
2. शुक्रवार को चावल का दान करें।
3. लक्ष्मी जी की उपासना करें।
भाग्येश चंद्र को अनुकूल करने के लिए निम्नलिखित उपाय करें।
1.ऊँ श्रां: श्रीं: श्रौं: सः चंद्रमसे नमः का जप करें।
2. चांदी के गिलास में जल पिएं।
3. शिव जी की उपासना करें।
यदि गुरु के कारण भाग्य साथ न दे रहा हो तो निम्नलिखित उपाय करें।
1. विष्णु जी की आराधना करें।
2. गाय को आलू में हल्दी लगा कर खिलाएं।
3. गुरुवार को पीली वस्तुओं का दान करें।
भाग्येश शनि को मजबूत करने के लिए निम्न उपाय करें।
1. काले वस्त्रों तथा नीले वस्त्रों को यथा संभव न पहनें।
2. शनिवार को पीपल के वृक्ष के नीचे दिया जलाएं।
3. शनिवार को हनुमान चालीसा का पाठ करें।
भाग्येश मंगल को अनुकूल करने के लिए निम्न उपाय करें।
1. मजदूरों को मंगलवार को मिठाई खिलाएं।
2. लाल मसूर का दान करें।
3. मंगलवार को सुंदर कांड का पाठ करें।
भाग्येश सूर्य को प्रबल करने के लिए निम्न उपाय करें।
1. गायत्री मंत्र का जप करें।
2. सूर्य को नियमित जल दें।
3. ''ऊँ खोल्काय नमः'' मंत्र का जप करें।
भाग्य को बदलने में केवल ईश्वर ही सक्षम है। अत: अपने अपने इष्टदेव का रोजाना पूजन, अर्चन, अराधना करते रहें।
मैं अपने कॉलेज के पास ही कमरा लेकर किराए पर रहा करता था शायद इसलिए क्योंकि मुझे वह हॉस्टल का माहौल ज्यादा पसंद नहीं आया था।
पर क्योंकि अब मैं पहली बार अपने घर से दूर मथुरा में अपनी पढ़ाई के लिए रह रहा था तो यकीनन मुझे अकेलापन महसूस होता था और उस अकेलेपन को दूर करने के लिए मैं रोज शाम को श्री कृष्णा जन्मभूमि मंदिर, भगवान के दर्शन करने पैदल ही जाया करता था।
क्योंकि श्री कृष्ण का जन्म स्थान मंदिर विश्व प्रसिद्ध है और पूरे भारत और विदेश से भी लोग वहां आते हैं। कृष्ण भक्तों के लिए वहां एकदम अनुपम वातावरण होता है और वहां जाकर मेरा बहुत मन लगता था। समय कैसे बीत जाया करता था पता ही नहीं चलता था। इस कारण कई बार मुझे लौटेने में काफी देर हो जाया करती थी। या कहूँ कि रात भी हो जाया करती थी।
यूं तो मेरा कमरा मंदिर से डेढ़-दो किलोमीटर ही दूर था पर एक शॉर्टकट की था जो रेलवे लाइन के किनारे किनारे जाता था और करीब 200 मीटर तक रेलवे ट्रैक पर भी चलना पड़ता था।
मुझे याद है कि सर्दियों के दिन थे
एक दिन मैं शयन आरती के बाद मंदिर से बाहर निकला और क्योंकि मैं अक्सर ही समय बचाने के लिए शॉर्टकट ले लिया करता था तो उस दिन भी मैंने शॉर्टकट लेने का फैसला किया।
उस वक्त मैंने नया-नया MP3 प्लेयर वाला नया मोबाइल फ़ोन लिया था। जो कि उस समय में मोबाइल फोन में नया फीचर माना जाता था। जिसके कारण मुझे फोन पर गाने सुनने का चस्का सा लग गया था। इसी कारण मैं अक्सर ईयर फोन जेब में लेकर ही चलता था और जब मौका मिलता गाने सुनने लगता था।
मंदिर से लौटते वक्त भी मैंने अपनी जेब से ईयर फोन निकाला और मोबाइल से कनेक्ट करके तेज आवाज में गाने सुनने लगा। भूतेश्वर रेलवे स्टेशन से होकर गुजरने वाला वह रास्ता अक्सर उस समय तक सुनसान हो जाया करता था और मैं उस रास्ते पर अपने गानों की धुन में मस्त चला जा रहा था।
और क्योंकि उस रास्ते पर कुछ दूरी तक ट्रैक पर भी चलना पड़ता था तो मैं उस ट्रैक पर चलने लगा। गाने सुनने में मैं इतना मस्त हो चुका था कि मुझे इस बात का भी अहसास नहीं था कि मैं ट्रैक पर चल रहा हूं।
पर तभी अचानक मेरा मोबाइल फोन पता नही कैसे अपने आप ही स्विच ऑफ हो गया। मुझे समझ नहीं आया कि ऐसा क्यों हुआ क्योंकि मोबाइल की बैटरी भी लगभग आधी से ज्यादा थी और क्योंकि मोबाइल भी नया था तो उसमें कोई दिक्कत भी नहीं थी।
मैं अभी इस बारे में सोच ही रहा था कि तभी मुझे पीछे से आती तेज रफ्तार ट्रेन का हॉर्न सुनाई दिया। वह ट्रेन कुछ ज्यादा ही पास आ चुकी थी।
मैं फौरन उस ट्रैक पर से बराबर झाड़ियो में कूद गया। ट्रेन बहुत तेजी के साथ निकल गई शायद वह राजधानी एक्सप्रेस थी। पर अब मुझे इस बात का एहसास हो चुका था कि अगर मेरा मोबाइल सही समय पर स्विच ऑफ ना होता तो उसका क्या अंजाम हो सकता था।
मैं नहीं जानता कि मेरे मोबाइल का स्विच ऑफ होना महज एक इत्तफाक था, कोई टेक्निकल खराबी थी या फिर भगवान ने मेरी रक्षा करी थी । पर उस दिन से मुझे इस बात का पक्का यकीन हो गया कि भगवान श्री कृष्ण सदा मेरे साथ हैं।
इस घटना के बाद मैंने कहीं भी रास्ते में आते-जाते समय ईयर फोन का इस्तेमाल करना बंद कर दिया।
~ राधे राधे
ना जाने कितने घर उजाड़ दिए थे। एक बार उसके सामने बंदियों को लाया गया। उन बंदियों में तुर्किस्तान के मशहूर कवि अहमद भी थे
अहमद को देख कर तैमूर ने दो गुलामो की और इशारा करते हुए कहा, "मने सुना है कवि बहुत पारखी होते हैं। अगर ऐसा है तो बताओ इन दोनो गुलामो की क्या कीमत होगी"
अहमद कुछ देर चुप रहने के बाद बोले, इन दोनों में से कोई भी 400 अशर्फियों से कम का नहीं है
यह सुनने के बाद तैमूर बहुत हैरान हो गया।
उसने तत्काल ये सवाल किया...अच्छा ये बताओ कि मेरी क्या कीमत होगी उसको लगा कि अहमद या तो डर के कारण चुप हो गए हैं या उसकी अधिक से अधिक कीमत के लिए सोच रहे हैं।
अहमद स्पष्टवादी थे. उसने जवाब दिया, ''की बादशाह आपकी कीमत सिर्फ 24, अशर्फिया है।
ये सुनते ही तैमूर गुस्से में बोला, "तुम क्या बकवास बोल रहे हो?
इतनी कीमत तो मेरे जूते का है।”
अहमद ने कहा, जी हां, मने आपके जूते की कीमत बताई है।
तैमूर लंग ने कहा, इसका मतलब मेरी कोई कीमत नहीं है।
अहमद ने कहा जी नहीं जिसकी शख्सियत में दया ना हो, कोई उसे इंसान कैसे मान सकता है, आपसे अच्छे तो ये गुलाम हैं कम से कम किसी के काम तो आते हैं
अहमद के ऐसे शब्द सुन कर तैमूर हैरान और शर्मिंदा हुआ कि क्यों कर उसने अहमद जसे दलेर और पारखी कवि से संवाद किया, इस प्रकरण के बाद तैमूर ने अहमद कवि से कोई संवाद नहीं किया या उन्हें नुकसान नहीं पहुंचाया।
दोस्तो नमस्ते, एक बार फिर से आपका स्वागत है मेरे ब्लॉग में...
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आज हम आपको बताएंगे! माता महलो वाली के बारे में....
जैसे की कहा जाता है की ऊपर वाले के रंग बड़े निराले होते हैं कुछ भी उसकी मर्जी के बिना नहीं होतातो ये बात है साल 1990 की जब माता रानी का इस कस्बे में आगमन हुआ...वास्तव में आज जिस स्थान पर ये मंदिर है वही पर साथ में ही एक प्राइमरी स्कूल है,और साथ में एक किला भी है ये किला रानी ज्वाला का था..जिनके नाम पर इस कस्बे (ज्वाली) का नाम रखा गया! उस स्कूल की एक वरिष्ठ शिक्षक को सपना आया की मेरे आगमन का समय आ गया है
सपनों में दिव्या शक्ति ने खुद बताया की वो को से कक्ष (स्थान) में मोजुद हैं..माता ने स्वप्न में उन शिक्षक को बताया कि की मैं मिट्टी के धेर में दबी हुई हूँ!मुझे बाहर निकालो..और स्थापना करो
उत्सकता वश वरिष्ठ शिक्षक ने अकेले किले
के अंदर जाने की हिम्मत दिखायी!और माता जी मूर्ति और उनके प्रतीक को बाहर ले कर आई!
माता की मूर्ति के बाहर आने के बाद स्थापना करना इतना आसान नहीं था! किले के वंशजो ने एकाएक किले पर और किले से मिली सारी ऐतिहासिक चीजो पर अधिकार बता दिया
काफ़ी समस्याओं के बाद मंदिर में माता जी की स्थापना हुई
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आशा है आने वाले समय में स्थिति सामान्य हो जाएगी और फिर से दुनिया खिलखायगी..इन शब्दों के साथ मैं अपनी पोस्ट समाप्त करूँगा आशा है आपको यह पसंद आएगी..जय माता दी
बहुत - बहुत धन्यवाद
सनातन धर्म में ये मान्यता है कि श्राद्ध पक्ष में पित्रों के लिए किया गया पिंड दान और तर्पण पित्रों को संतुष्टि मिलती है और इस से पितृ के सा...