केतु महादशा
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1. केतु कौन है?
- केतु ज्योतिष में एक नक्षत्र ग्रह है जो राहू के साथ मिलकर केतु ग्रह को बनाता है। यह चंद्रमा का सर्वाधिक निकटतम ग्रह होता है और उसके नक्षत्र मकर और कुंभ होते हैं।
2. केतु महादशा की विशेषताएँ
केतु महादशा लगभग 7 वर्षों की होती है और इसके दौरान व्यक्ति को अनेक प्रकार के अनुभव होते हैं। यह महादशा शांतिपूर्ण या अस्तव्यस्त भी हो सकती है, इसका प्रभाव जन्मकुंडली के अनुसार होता है।
3. सकारात्मक पहलु
- केतु महादशा में व्यक्ति को अच्छी समझ, विचारशीलता और अद्वितीयता की ओर बढ़ाने की क्षमता मिल सकती है। इस दौरान उसकी ध्यान केंद्रित और उसके अंदर का ज्ञान वृद्धि कर सकती है।
4. ऋणात्मक पहलु
- यदि केतु महादशा अशुभ होती है, तो व्यक्ति विचलित हो सकता है और अनियंत्रित भावनाओं का सामना कर सकता है। यह दौरान उसकी शांति और आत्मसमर्पण की आवश्यकता होती है।
5. सामाजिक प्रभाव
- केतु महादशा के दौरान व्यक्ति का सामाजिक जीवन भी प्रभावित हो सकता है। यह उसके सम्बंधों और समाज में स्थान के परिवर्तन का कारण बन सकती है।
6. स्वास्थ्य एवं परिवार
- केतु महादशा व्यक्ति के स्वास्थ्य और परिवारिक जीवन पर भी प्रभाव डाल सकती है। यह दौरान व्यक्ति को स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
7. धार्मिक एवं आध्यात्मिक दृष्टिकोण
- केतु महादशा व्यक्ति को धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण में उच्च स्थान पर पहुँचने की क्षमता प्रदान कर सकती है। यह दौरान व्यक्ति का मानवता के प्रति दृष्टिकोण विकसित हो सकता है।
8. केतु महादशा का समापन
- केतु महादशा की समाप्ति के बाद व्यक्ति का जीवन नई दिशा में बदल सकता है। यह दौरान उसकी अनुभवों और सीखों से उसे एक नया स्वरूप देने की क्षमता होती है।
केतु महादशा ज्योतिष में एक महत्वपूर्ण और रहस्यमयी दौर है, जिसमें व्यक्ति को जीवन के विभिन्न पहलुओं में अनुभव होते हैं। इस दौरान व्यक्ति की सच्चाई और स्वभाव की पहचान होती है, और उसे अपने आप से जुड़ा हर अनुभव महत्वपूर्ण सीख सजग रहने के लिए उपयुक्त होता है।
