मंगलवार, 16 सितंबर 2025

मोक्ष स्थली गया जी

 सनातन धर्म में ये मान्यता है कि श्राद्ध पक्ष में पित्रों के लिए किया गया पिंड दान और तर्पण पित्रों को संतुष्टि मिलती है और इस से पितृ के साथ आने वाली पीढ़ी का भी उधार हो जाता है श्राद्ध पक्ष में देश भर में ऐसे कई स्थान हैं जहां पिंड दान करने से पित्रों को मोक्ष मिलने की बात कही जाती है


इसमें एक बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है, शास्त्रों में बताया गया है कि गया वो स्थान है जहां पर पिंड दान करने से108 कुलों और आने वाली पीढ़ी का उद्धार ही जाता है

पुराणों में गया जी को मोक्ष स्थली के नाम से जाना जाता है

क्योंकि यहां पर साक्षात भगवान विष्णु जी पितृ देव के रूप में निवास करते हैं, गया जी बिहार राज्य में स्थित है और फल्गु नदी के किनारे पर किया गया पिंडदान बहुत महत्वपूर्ण है, ऐसा कहा जाता है कि जिसने भी गया जी में पिंडदान किया है, वह पितृ ऋण से मुक्त हो जाएगा।

गुरुवार, 27 जून 2024

 केतु महादशा



1. केतु कौन है?

   - केतु ज्योतिष में एक नक्षत्र ग्रह है जो राहू के साथ मिलकर केतु ग्रह को बनाता है। यह चंद्रमा का सर्वाधिक निकटतम ग्रह होता है और उसके नक्षत्र मकर और कुंभ होते हैं। 


2. केतु महादशा की विशेषताएँ

    केतु महादशा लगभग 7 वर्षों की होती है और इसके दौरान व्यक्ति को अनेक प्रकार के अनुभव होते हैं। यह महादशा शांतिपूर्ण या अस्तव्यस्त भी हो सकती है, इसका प्रभाव जन्मकुंडली के अनुसार होता है।


3. सकारात्मक पहलु

   - केतु महादशा में व्यक्ति को अच्छी समझ, विचारशीलता और अद्वितीयता की ओर बढ़ाने की क्षमता मिल सकती है। इस दौरान उसकी ध्यान केंद्रित और उसके अंदर का ज्ञान वृद्धि कर सकती है। 


4. ऋणात्मक पहलु

   - यदि केतु महादशा अशुभ होती है, तो व्यक्ति विचलित हो सकता है और अनियंत्रित भावनाओं का सामना कर सकता है। यह दौरान उसकी शांति और आत्मसमर्पण की आवश्यकता होती है।


5. सामाजिक प्रभाव

   - केतु महादशा के दौरान व्यक्ति का सामाजिक जीवन भी प्रभावित हो सकता है। यह उसके सम्बंधों और समाज में स्थान के परिवर्तन का कारण बन सकती है।


6. स्वास्थ्य एवं परिवार

   - केतु महादशा व्यक्ति के स्वास्थ्य और परिवारिक जीवन पर भी प्रभाव डाल सकती है। यह दौरान व्यक्ति को स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।


7. धार्मिक एवं आध्यात्मिक दृष्टिकोण

   - केतु महादशा व्यक्ति को धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण में उच्च स्थान पर पहुँचने की क्षमता प्रदान कर सकती है। यह दौरान व्यक्ति का मानवता के प्रति दृष्टिकोण विकसित हो सकता है।


8. केतु महादशा का समापन

   - केतु महादशा की समाप्ति के बाद व्यक्ति का जीवन नई दिशा में बदल सकता है। यह दौरान उसकी अनुभवों और सीखों से उसे एक नया स्वरूप देने की क्षमता होती है।


केतु महादशा ज्योतिष में एक महत्वपूर्ण और रहस्यमयी दौर है, जिसमें व्यक्ति को जीवन के विभिन्न पहलुओं में अनुभव होते हैं। इस दौरान व्यक्ति की सच्चाई और स्वभाव की पहचान होती है, और उसे अपने आप से जुड़ा हर अनुभव महत्वपूर्ण सीख सजग रहने के लिए उपयुक्त होता है।

शनिवार, 2 सितंबर 2023

व्यापार वृद्धि के 6 सिद्ध उपाय !

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बुधवार, 30 अगस्त 2023

किस्मत चमकाने के उपाय


लग्न कुंडली मे नवे भाव का स्वामी भाग्येश कहलाता है। भाग्येश के अनुकूल न होने के कारण जीवन में दुरूह परिस्थितियों से दो चार होना पडता है। अक्सर लोग कोई कार्य करते है, परंतु सफलता नहीं मिलती। हम कड़ी मेहनत करते हैं। परंतु परिणाम नुकसानदायक आता है। यह भाग्य की कमजोरी से होता है। भाग्य कमजोर होने पर सारे प्रयास विफल हो जाते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जन्म कुण्डली का नवम भाव भाग्य का होता है। यह स्थान यदि दूषित हो तो जातक भाग्यहीन होता है। नवम स्थान पर यदि चंद्र हो या उसकी दृष्टि हो तो भाग्य प्रबल होता है। वहीं राहु, मंगल, शनि यदि शत्रु राशि युक्त या नीच के हो तो जातक भाग्यहीनता से परेशान हो जाता है। उसको जरा जरा से काम में अड़चने आती हैं। सूर्य, शुक्र, बुध भाग्य स्थान पर सौभाग्यवती नारी दिलाते हैं। जो व्यक्ति के भाग्य को चमोत्कर्ष कर देती है। भाग्य स्थान पर गुरु मान सम्मान वैभव दिलाता है। वह व्यक्ति शुरू से ही अपने भाग्य के दम पर पूरे घर को तार देता है। केतु भाग्य स्थान पर सामान्य फल देने वाला होता है।


यदि बुध भाग्येश होकर अच्छा फल देने में असमर्थ हो तो निम्न उपाय करने चाहिए।


1. तांबे का कड़ा हाथ में धारण करें।


2. गणेश जी की उपासना करें।


3. गाय को हरा चारा खिलाएं।


यदि शुक्र भाग्येश होकर फलदायक न हो तो निम्न उपाय करने चाहिए।


1. स्फटिक की माला से क्क शुं शुक्राय नमः की एक माला का जप करें।


2. शुक्रवार को चावल का दान करें।


3. लक्ष्मी जी की उपासना करें।


भाग्येश चंद्र को अनुकूल करने के लिए निम्नलिखित उपाय करें।


1.ऊँ श्रां: श्रीं: श्रौं: सः चंद्रमसे नमः का जप करें।


2. चांदी के गिलास में जल पिएं।


3. शिव जी की उपासना करें।


यदि गुरु के कारण भाग्य साथ न दे रहा हो तो निम्नलिखित उपाय करें।


1. विष्णु जी की आराधना करें।


2. गाय को आलू में हल्दी लगा कर खिलाएं।


3. गुरुवार को पीली वस्तुओं का दान करें।


भाग्येश शनि को मजबूत करने के लिए निम्न उपाय करें।


1. काले वस्त्रों तथा नीले वस्त्रों को यथा संभव न पहनें।


2. शनिवार को पीपल के वृक्ष के नीचे दिया जलाएं।


3. शनिवार को हनुमान चालीसा का पाठ करें।


भाग्येश मंगल को अनुकूल करने के लिए निम्न उपाय करें।


1. मजदूरों को मंगलवार को मिठाई खिलाएं।


2. लाल मसूर का दान करें।


3. मंगलवार को सुंदर कांड का पाठ करें।


भाग्येश सूर्य को प्रबल करने के लिए निम्न उपाय करें।


1. गायत्री मंत्र का जप करें।


2. सूर्य को नियमित जल दें।


3. ''ऊँ खोल्काय नमः'' मंत्र का जप करें।


भाग्य को बदलने में केवल ईश्वर ही सक्षम है। अत: अपने अपने इष्टदेव का रोजाना पूजन, अर्चन, अराधना करते रहें।

सोमवार, 28 अगस्त 2023

भगवान कृष्ण का साक्षात चमत्कार


 ये बात आज से करीब 12 साल पहले की है। जब मैं मथुरा के एक कॉलेज से अपनी स्नातक की पढ़ाई पूरी कर रहा था। मेरा कॉलेज मथुरा शहर के बीचोंबीच था और मेरे कॉलेज के पास ही श्री कृष्ण जन्मस्थान मंदिर भी था। वैसे तो बचपन से ही मेरी श्रद्धा श्री कृष्ण के प्रति थी पर उस समय मेरी भक्ति पूरे उफान पर थी।


मैं अपने कॉलेज के पास ही कमरा लेकर किराए पर रहा करता था शायद इसलिए क्योंकि मुझे वह हॉस्टल का माहौल ज्यादा पसंद नहीं आया था।


पर क्योंकि अब मैं पहली बार अपने घर से दूर मथुरा में अपनी पढ़ाई के लिए रह रहा था तो यकीनन मुझे अकेलापन महसूस होता था और उस अकेलेपन को दूर करने के लिए मैं रोज शाम को श्री कृष्णा जन्मभूमि मंदिर, भगवान के दर्शन करने पैदल ही जाया करता था।

क्योंकि श्री कृष्ण का जन्म स्थान मंदिर विश्व प्रसिद्ध है और पूरे भारत और विदेश से भी लोग वहां आते हैं। कृष्ण भक्तों के लिए वहां एकदम अनुपम वातावरण होता है और वहां जाकर मेरा बहुत मन लगता था। समय कैसे बीत जाया करता था पता ही नहीं चलता था। इस कारण कई बार मुझे लौटेने में काफी देर हो जाया करती थी। या कहूँ कि रात भी हो जाया करती थी।


यूं तो मेरा कमरा मंदिर से डेढ़-दो किलोमीटर ही दूर था पर एक शॉर्टकट की था जो रेलवे लाइन के किनारे किनारे जाता था और करीब 200 मीटर तक रेलवे ट्रैक पर भी चलना पड़ता था।


मुझे याद है कि सर्दियों के दिन थे


दिन जल्दी ढल जाया करता था और मंदिर में शयन आरती के बाद निकलते हुए साढ़े आठ या नौ बज जाया करते थे।


एक दिन मैं शयन आरती के बाद मंदिर से बाहर निकला और क्योंकि मैं अक्सर ही समय बचाने के लिए शॉर्टकट ले लिया करता था तो उस दिन भी मैंने शॉर्टकट लेने का फैसला किया।


उस वक्त मैंने नया-नया MP3 प्लेयर वाला नया मोबाइल फ़ोन लिया था। जो कि उस समय में मोबाइल फोन में नया फीचर माना जाता था। जिसके कारण मुझे फोन पर गाने सुनने का चस्का सा लग गया था। इसी कारण मैं अक्सर ईयर फोन जेब में लेकर ही चलता था और जब मौका मिलता गाने सुनने लगता था।


मंदिर से लौटते वक्त भी मैंने अपनी जेब से ईयर फोन निकाला और मोबाइल से कनेक्ट करके तेज आवाज में गाने सुनने लगा। भूतेश्वर रेलवे स्टेशन से होकर गुजरने वाला वह रास्ता अक्सर उस समय तक सुनसान हो जाया करता था और मैं उस रास्ते पर अपने गानों की धुन में मस्त चला जा रहा था।

और क्योंकि उस रास्ते पर कुछ दूरी तक ट्रैक पर भी चलना पड़ता था तो मैं उस ट्रैक पर चलने लगा। गाने सुनने में मैं इतना मस्त हो चुका था कि मुझे इस बात का भी अहसास नहीं था कि मैं ट्रैक पर चल रहा हूं।


पर तभी अचानक मेरा मोबाइल फोन पता नही कैसे अपने आप ही स्विच ऑफ हो गया। मुझे समझ नहीं आया कि ऐसा क्यों हुआ क्योंकि मोबाइल की बैटरी भी लगभग आधी से ज्यादा थी और क्योंकि मोबाइल भी नया था तो उसमें कोई दिक्कत भी नहीं थी।


मैं अभी इस बारे में सोच ही रहा था कि तभी मुझे पीछे से आती तेज रफ्तार ट्रेन का हॉर्न सुनाई दिया। वह ट्रेन कुछ ज्यादा ही पास आ चुकी थी।


मैं फौरन उस ट्रैक पर से बराबर झाड़ियो में कूद गया। ट्रेन बहुत तेजी के साथ निकल गई शायद वह राजधानी एक्सप्रेस थी। पर अब मुझे इस बात का एहसास हो चुका था कि अगर मेरा मोबाइल सही समय पर स्विच ऑफ ना होता तो उसका क्या अंजाम हो सकता था।


मैं नहीं जानता कि मेरे मोबाइल का स्विच ऑफ होना महज एक इत्तफाक था, कोई टेक्निकल खराबी थी या फिर भगवान ने मेरी रक्षा करी थी । पर उस दिन से मुझे इस बात का पक्का यकीन हो गया कि भगवान श्री कृष्ण सदा मेरे साथ हैं।



इस घटना के बाद मैंने कहीं भी रास्ते में आते-जाते समय ईयर फोन का इस्तेमाल करना बंद कर दिया।


~ राधे राधे

शुक्रवार, 21 जुलाई 2023

आदमी की कीमत


बादशाह तैमूर लंग की क्रुरता से उसकी प्रजा बहुत परेशान थी उसने ना जाने कितने देश को कुचल डाला था। 

ना जाने कितने घर उजाड़ दिए थे। एक बार उसके सामने बंदियों को लाया गया। उन बंदियों में तुर्किस्तान के मशहूर कवि अहमद भी थे 

अहमद को देख कर तैमूर ने दो गुलामो की और इशारा करते हुए कहा, "मने सुना है कवि बहुत पारखी होते हैं। अगर ऐसा है तो बताओ इन दोनो गुलामो की क्या कीमत होगी"

अहमद कुछ देर चुप रहने के बाद बोले, इन दोनों में से कोई भी 400 अशर्फियों से कम का नहीं है

यह सुनने के बाद तैमूर बहुत हैरान हो गया।

उसने तत्काल ये सवाल किया...अच्छा ये बताओ कि मेरी क्या कीमत होगी उसको लगा कि अहमद या तो डर के कारण चुप हो गए हैं या उसकी अधिक से अधिक कीमत के लिए सोच रहे हैं।

अहमद स्पष्टवादी थे. उसने जवाब दिया, ''की बादशाह आपकी कीमत सिर्फ 24, अशर्फिया है।

ये सुनते ही तैमूर गुस्से में बोला, "तुम क्या बकवास बोल रहे हो?

इतनी कीमत तो मेरे जूते का है।”

अहमद ने कहा, जी हां, मने आपके जूते की कीमत बताई है।

तैमूर लंग ने कहा, इसका मतलब मेरी कोई कीमत नहीं है।

अहमद ने कहा जी नहीं जिसकी शख्सियत में दया ना हो, कोई उसे इंसान कैसे मान सकता है, आपसे अच्छे तो ये गुलाम हैं कम से कम किसी के काम तो आते हैं

अहमद के ऐसे शब्द सुन कर तैमूर हैरान और शर्मिंदा हुआ कि क्यों कर उसने अहमद जसे दलेर और पारखी कवि से संवाद किया, इस प्रकरण के बाद तैमूर ने अहमद कवि से कोई संवाद नहीं किया या उन्हें नुकसान नहीं पहुंचाया।





गुरुवार, 20 जुलाई 2023

गुरु जी के अनुभव

 दोस्तो नमस्ते, एक बार फिर से आपका स्वागत है मेरे ब्लॉग में...



आज हम गुरु जी के अनुभव आपको बताएंगे! हमारे देश में बहुत से ऋषि मुनि हुए हैं जिन्होने समय समय पर लोगो के दुख तकलीफ का निवारण , अपनी  शक्तियो के द्वारा किया है
गुरु जी भी एक ऐसे ही दिव्य पुरुष थे जो समान रूप से लोगो का कल्याण करते थे  

आज मैं दिल्ली के रहने वाले दिलीप सिंह  के स्वयं सिद्ध अनुभव को आपके साथ साझा कर रहा हूं

दिलीप सिंह जनकपुरी दिल्ली के एक साधरण परिवार में रहते हैं उनका कहना है कि मैं किसी भी गुरु या बाबा को नहीं मानता था परन्तु एक बार घर वालो के साथ मुझे बड़े मंदिर जाने का सौभाग्य मिला !
गुरु जी वहा पर संतरी लिबास में विराजमान थे 

मैंने भी वहा जाने पर उनको प्रणाम किया और अपनी तकलीफ दिल में कही भी और अरदास की !...
और उसके बाद में संगत में जा कर वैठ गया !

थोड़ी देर के बाद मुझे गुरु जी ने अपने पास बुलाया और कहा की क्या काम करते हो तो मैंने कहा की एसी रिपेयर की दुकान है तो कहते की इसकी एसी मरम्मत की दुकान है पर काम नहीं है मुझे ये बात अच्छी नहीं लगी की गुरु जी ने मेरा अपमान कर दिया ! पर क्या कर सकता था और ये बात सच भी थी तो  मैंने कहा हांजी गुरु जी काम नहीं है जी  बिलकुल  भी..


मेरे ऐसा कहने पर वो बोले कोई बात नहीं ,7 गुरुबार यहाँ आना सब अच्छा होगा उसके बाद मैं और मेरी पत्नी घर आ गए ! पहला गुरुबार आया  मैंने कुछ रुपये निकाले की गुरु जी के मंदिर जाना है स्कूटर में पेट्रोल डलवाने तक के पेसे नहीं होते थे मेरे पास उन दिनो..खैर जैसे तेसे एक गुरुबार हुआ

अब दुसरा गुरुवार आया ,भाई से बाइक मांगी भाई ने कहा कोई बात नहीं ले जा...अगले गुरुबार को फिर वही दिक्कत...की गुरु जी के जाना है पर जाऊ केसे ! मैं अपनी गली में सर पर हाथ रख के बेटा हुआ था की मेरा पड़ौसी आया और बोला की क्या हुआ मैंने कहा की गुरु जी के जाना है पर जाऊ केसे पैसे नहीं है मेरे पास...उसने  कहा कोई बात नहीं मेरी बाइक खड़ी है इसे ले जा 
 
ऐसे ऐसे कर के  मैंने 6 गुरुबार पूर्ण कर लिए जिस दिन छटा गुरुबार था उस दिन फिर से मुझे फिर से गुरु जी ने बुलाया और कहा की सब ठीक है मैंने कहा की गुरु जी मेहर करो गुरु जी बोले कोई नहीं अभी 7बा गुरुबार रहता है सब अच्छा होगा मैं चुप रहा और प्रणाम कर के घर बापिस आ गया..घर पहूँचा ही था की मुझे इंटरव्यू की कॉल आ गई!मेरी एसी रिपेयर की शॉप है पर वैसे मैंने डिप्लोमा किया था मैकेनिकल में..अगले दिन मैं तैयार हो कर इंटरव्यू में गया मेरा सिलेक्शन हो गया  मैं बहुत खुश था ! ऑफर लेटर मिला और   मुझे अगले गुरुबार को जॉब ज्वाइन करना था मैंने अपने मन में गुरु जी का बार बार शुक्राना किया एक बात जो मुझे पूरी तरह से  आश्चर्य चकित कर रही थी की दस लड़कों में सिर्फ मेरा चयन हुआ केसे मुझे नहीं पता ,पर यकिनन ये सब गुरु जी की मैहर थी अगले गुरुबार को मैं समय पर कंपनी मे पंहुच गया और जॉब ज्वाइन कर ली !

जॉब ज्वाइन करते ही  मुझे  मेरे बॉस ने एक परची दी और कहा की ये पेट्रोल की पर्ची है अपनी बाइक की टंकी फुल करबा लो पेमेंट ऑफिस से हो जाएगी !आप यकिन मनिये संगत जी ,मेरी आंखो में आंसु आ गए की जिस पेट्रोल के लिए में लोगो से बाइक मांगता था की मुझे गुरु जी के पास जाना है  गुरु जी ने सबसे पहले मेरी पेट्रोल की समस्या दूर की...जय गुरु जी की, शुक्राना गुरु जी, गुरु जी सब कुछ जानते हैं वो कहते हैं ना, की बिन बोले सब कुछ जानते हैं !

मेरी एक और समस्या थी पाइल्स की वैसे तो बहुत से लोगो को ये समस्या होती है पर इसका दर्द वही समझ सकता है जो समस्या से जुझ रहा हो बहुत तकलीफ में था मैं..मेरी पत्नी ने कहा आप गुरु जी को अरदास करो वही एक है जो सब ठीक करेंगे !मैने गुरु जी को अरदास करी ! अगली बार फिर से गुरु जी के पास गए क्यों की गुरु जी का शुक्राना भी तो करना था बड़े मंदिर   पहुचते ही गुरु जी ने कहा क्यों लग गई नौकरी मैंने कहा जी गुरु जी तो, मुझे कहते हैं आते रहना यहाँ पर..मैंने और मेरी पत्नी ने लंगर किया और अभी लंगर हाल में ही मौजुद थे की इतने में एक अंकल आए और बोले ये लो आपका परशादा ,खा लिजिये मैंने कहा मैंने लंगर कर लिया है अंकल ...तो कहते हैं गुरु जी ने आपके लिए भेजा है आपका आशीर्वाद है..लीजिये ,मैने परशादा ले लिया ! 

परशादे में दो रोटी और लाल मिर्चो की चटनी थी !अब  मैं क्या करू.. मुझे तो बवासीर थी और बवासीर वाले आदमी के लिए मिर्च जहर की तरह होती है फिर भी मैं खा गया..थोड़ी देर के बाद मेरी पत्नी आई तो मैंने उसे बताया की ऐसे मैंने मिर्ची वाला परशादा खा लिया वो बोली आपने खा लिया ,मैंने बोला हा खा लिया गुरु जी ने भेजा था तो ना कैसे करता..वो कहती अब..मैंने कहा चल अब देखते हैं..संगत जी मेरा घर बड़े मंदिर से 30 - 32 किमी दूर है

  मैं ये सोच रहा था की अब बाइक केसे चला सकुंगा ! अच्छा जी, मैं अपने घर  पहुच  गया कोई समस्या नहीं हुई ! रात में सो गया अगला दिन आ गया कोई समस्या नहीं..

मुझे डॉक्टर ने पाइल्स का ऑपरेशन बताया था , सो मुझे उसके पास जाना ही था, तो मैं उसके पास गया डॉक्टर ने चेक किया और कहा बहुत अच्छा..आपकी समस्या अब नहीं है ऑपरेशन करबाने की जरूरत नहीं है..देखा मेरी दवा का कमाल..मैंने कहा हांजी डॉक्टर साहब , पर मुझे तो पता था की असली डॉक्टर कौन है..ऐसे है गुरु जी, उनके कृपा करने के तरीके बहुत हैं वैसे भी जब गुरु जी भौतिक रूप में थे तो कहा करते थे कि क्यों कर दी मैंने डॉक्टर की डॉक्टरी फेल..

ऐसी जाने कितनी कृपा गुरु जी ने हमारे परिवार पर की है ,ऐसे ही वो हम सब पर अपनी मेहर  बनाये  रखे !

मोक्ष स्थली गया जी

 सनातन धर्म में ये मान्यता है कि श्राद्ध पक्ष में पित्रों के लिए किया गया पिंड दान और तर्पण पित्रों को संतुष्टि मिलती है और इस से पितृ के सा...